Friday, September 19, 2008

दबगों को दाल-भात-सब्जी, दलितों को माड़-नमक-भात

बिहार के पूर्वी-उत्तरी हिस्से में बहनेवाली कोसी नदी में पिछले एक डेढ महीने से आयी भयंकर बाढ़ से बड़े इलाके में तांडव मचा हुआ है। लेकिन इस विषम परिस्थिति में भी वहां छूआछूत और जातीय व्यवस्था मजबूती से अपने निर्ममतम रूप में जमी हुई है। अखबारों में खबरें आ रही हैं कि दलित जाति के लोगों व बच्चों को न केवल यहां ठीक से खाना नहीं दिया जा रहा है बल्कि दलितों के साथ जानवरों जैसा व्यवहार भी हो रहा है। उन्हें मारापीटा तक जा रहा है। दलितों के साथ दुव्र्यवहार करनेवाले सरकारी अमले तो हैं ही, वे भी हैं जो खुद इस बाढ का कहर झेल रहे हैं।

दलित वाच नामक संगठन के लोग सुपौल के राहत शिविरों में व्यवस्था देखने गए थे। इसके बाद उन्होंने गुरुवार 18 सितम्बर को पटना में संवाददाता सम्मेलन किया। इसमें इन्होंने यह खुलासा किया है कि राहत शिविरों में जाति के आधार पर भोजन परोसा जा रहा है। दबंग जाति के लोगों को दाल-भात और सब्जी तथा दलितों को माड़-भात व नमक खाने को दिया जा रहा है। सभी प्रकार के राहत कार्यों में दलितों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। दलित परिवारों के साथ दुर्व्यवहार की भी अनेक घटनाएं सामने आईं हैं।

दलित वाच की ओर से पद्मश्री सुधा वर्गीज ने बताया कि सुपौल जिले के प्रतापगंज प्रखंड के बांसचौक शिविर में दलित समुदाय के भोकूराम ने अपने बच्चों के लिए भोजन की मांग की तो बीडीओ के सुरक्षा गार्ड ने उसकी पिटाई कर दी। इसी प्रकार मधेपुरा के शंकरपुर प्रखंड के मौरा भारती गांव के एक शिविर में दलितों को माड़-भात व नमक दिया गया, जबकि दबंग समुदाय के लोगों को दाल-भात व सब्जी दी गई। इसी जिले के बिहारीगंज में स्थित 43 नंबर शिविर में मुसहर जाति की सोनी कुमारी को चापाकल से पानी भरने के दौरान छेड़छाड़ का सामना करना पड़ा। सहरसा जिले के सौरबाजार मध्य विद्यालय में चल रहे शिविर में नंदकिशोर पासवान से दबंगों ने 2200 रुपये लूट लिए।

दलित वाच के 110 कार्यकर्ताओं ने 204 राहत शिविरों में जाकर दो सप्ताह तक सघन निगरानी की है।

2 टिप्पणियाँ:

अफ़लातून said...

जाति-विद्वेष का नंगा और घिनौना सच प्रकट किया।

सतीश पंचम said...

बडी दुखद और शोचनीय स्थिति है।