इस बार के चुनावों में कई बातें ऐसी हुई हैं, जो इससे पहले कभी नहीं हुई। इससे कई ऐसी कहानियां जुड़ी हैं, जो आनेवाली पीढ़ियों को सुनाई जाती रहेंगी।
इस समय मेरे दिमाग मे एक महिला की छवि कौंध रही है जो एटलांटा में वोट देने के लिए लाइन में खड़ी थीं। 106 वर्षीय एन. निक्सन कूपर एक सदी का समय देख चुकी हैं। वह तब पैदा हुई थीं, जब बहुत अधिक कारें नहीं थीं, न आकाश में बहुत अधिक विमान हुआ करते थे। उस समय दो वजहों से निक्सन जैसे लोगे वोट नहीं डाल पाते थे- एक, उनका महिला होना और दूसरा, उनकी त्वचा का रंग। इस रात मैं सोचता हूं कि इस महिला ने एक सदी में काफी कुछ देख लिया है। दिल में उम्मीद की किरण से लेकर पीड़ा के नासूर तक, संघर्ष से लेकर प्रगति तक।
उसने वह समय भी देखा जब महिलाओं की आवाज दबाई जाती थी औ यह समय भी जब महिलाएं अपनी आवाज बुलंद कर सकती हैं, वोट दे सकती हैं। इतने सालों मे उसने अमेरिका का सर्वश्रेष्ठ समय भी देखा और बदतर समय भी। वह जानती है कि कैसे अमेरिका बदल सकता है। जी हां, हम अमेरिका को बदल सकते हैं।
(बुधवार की सुबह शिकागों में दिया बराक ओबामा के ऐतिहासिक भाषाण का एक अंश। यह भाषण ओबामा ने मार्टिन लूथर किंग को समर्पित किया है।)
Thursday, November 6, 2008
ओबामा का ऐतिहासिक भाषण
प्रस्तुतकर्ता
अतुल
पर
8:29 AM
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2 टिप्पणियाँ:
जी, सुना पूरा भाषण.
yea it's right .they are changing and its good for them and the worls also
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