Saturday, November 22, 2008

महाराष्ट् क्यों जा रहे हैं बिहारी

शुक्रवार 21 नवंबर को हिन्दुस्तान टाइम्स लीडरिशप समिट में रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव के भाषण का सत्र चल रहा था। एक श्रोता ने सवाल किया बिहार का विकास क्यों नहीं हुआ। लालू ने हल्के ढंग से कह दिया कि आजादी के बाद केंद्र से सौतेला व्यवहार हुआ और बिहार का विकास नहीं हो पाया। यह गलत सरासर गलत जवाब था। जानने वाले जानते होंगे कि आजादी के बाद बिहार देश के अग्रणी और विकासशील राज्यों में शुमार होता था। देश में औद्योगिककरण की प्रक्रिया जब शुरू हुई तो बिहार में कई उद्योग लगे। अब ये उद्योग झारखंड में हैं। दामोदर घाटी परियोजना का निर्माण हुआ। बरौनी में तेलशोधक कारखाना खुला। सिंदरी में खाद, तो दर्जन भर स्थानों पर छोटे उद्योग और चीनी मिलें लगीं।

लेकिन 80 के दशक से बिहार के दुर्दिन शुरू हो गए। इस दुर्दिन की शुरूआत जगन्नाथ मिश्र ने की जिसको अंतिम अंजाम तक खुद लालू ने अपने 15 वर्षों के काले राज में पहुंचा दिया। जब लालू ने कहा कि लोगों के लिए रोजगार नहीं है तो तत्काल हस्तक्षेप करते हुए सत्र के अध्यक्ष राजदीप सरदेसाई ने कहा कि आपके राज्य के लोग तो पलायन कर हमारे महाराष्ट्र में आ रहे हैं। आपने रोजगार की कोई व्यवस्था ही नहीं की है। लालू का जवाब फिर गैर जिम्मेदाराना रहा। उन्होंने मसखरापन दिखाकर सवाल की धार को ही कुंद कर दिया। कह दिया कि महाराष्ट्र हमारा राज्य है। दिल्ली हमारा राज्य है। हम सब भारतीय हैं। यह कोई जवाब नहीं है। यह बात को टालना है।

बिहार से लोग काम की तलाश में इसलिए मुंबई या महाराष्ट्र में कहीं जाते हैं कि बिहार में उद्योग धंधों को इन राजनेताओं की नीतियों ने चौपट कर दिया है। अगर बिहार के उद्योग बने रहते तो लोग कहीं नहीं जाते और न ही मुंबई, दिल्ली जैसे शहरों पर भार बढता। इसके लिए राष्ट्रीय नीतियां भी जिम्मेदार हैं, जो उद्योगों का सेज बनाती हैं और देशभर के उद्योग धंधों को खत्म करती हैं।

8 टिप्पणियाँ:

Suresh Chiplunkar said...

इतना सब हो जाने के बावजूद भी तो बिहार के लोग लालू को ही चाहते हैं… अपना "हीरो" मानते हैं, हम मध्यप्रदेश के लोगों ने दिग्विजय सिंह जैसे बंटाढारी नेता को बाहर का रास्ता दिखा दिया था, और शायद इस बार भी कांग्रेस को सत्ता में न आने दें, ऐसा ही कुछ बिहार में लालू के पाँच साल के शासन के बाद ही हो जाता तो शायद बिहार आज इतना पीछे न होता… लेकीन जीजा-सालों के साथ अपराधियों की जुगलबन्दी ने बिहार की दुर्गति बनाकर रख दी, फ़िर भी वहाँ की जनता चुप है… रही बात मसखरेपन की, तो लालू शुरु से ही "जोकर" से अधिक कुछ नहीं रहे… और यदि मीडिया और जनता को यही पसन्द है तो उनका दुर्भाग्य…

विवेक सिंह said...

सही कहा जी आपने ! जनता भोली है और नेता शातिर .

ab inconvenienti said...

'भोला' शब्द 'बेवकूफ' या 'मूर्ख' का सम्मानजनक पर्याय है.

PN Subramanian said...

यह विडंबना ही है की मगध जो भारत की शान थी, नंदो, मौरयों के जमाने से, आज इकलौते जोकर के कारण हाशिए पर चला गया है. बिहारी ना केवल महाराष्ट्रा में बल्कि दक्षिण के प्रदेशों में भी भटक रहे हैं.
http://mallar.wordpress.com

Mired Mirage said...

सब प्रान्त हमारे हैं कहना बहुत सही है । बिहारी कहीं भी जाए, काम करे परन्तु बिहार में भी तो उसे व अन्य भारतीयों को काम मिले । व्यक्ति जब किसी पद विशेष या किसी विशेष काम के लिए घर से दूर जाता है तो उसे दुख नहीं होता परन्तु यदि केवल दो रोटी का जुगाड़ करने को उसे भटकना पड़े तो कहीं कुछ गलत तो है ही ।
घुघूती बासूती

विनीत उत्पल said...

kahan hai aaj ashok paper mil, kahan hai aaj mudhubanee painting, kahan hai aaj bhagalput ka bararee industrial area. kahan hai aaj munger ka banduuk karkhana.

netaon ne jam kar bihar ko luuta hai. logon ko palayan ke liye majbuur kiya hai. chahe jagnanth mishra ho ya lalu yadev. pahlee bar jab lalu panch sal ke liye mukhymantree bane the to kaha gaya tha unhen jagnannth mishra ne sarkaree khajana luutne ka tarkeeb bata diya. mamla jo bhee ho yadi ek bar bihar kee janta in "Mahan" neton ko sabak sikhane kee kasam kha kar vote ka kartab dikha de to puuree duniya bihar ke kadam chuumne ke liye majÙuur hogee.

Anil said...

बिहार में गुंडाराज के चलते कौन मूर्ख उद्योग लगाने वहाँ जायेगा? पहले सुरक्षा मिले, फिर रोजगार भी मिलेगा।

Nivedita Khandekar said...

Migration of Biharis to Maharashtra and other states of India has been going on for many years. Be it the tea workers in Assam, farm labourers in Punjab, construction workers somewhere else and so on ...

Politicians will be politicians, be they from Bihar or from Maharashtra. Ask those espousing the cause of 'Marathi Manoos" how many jobs they have generated for the sons of the soils and I am sure, the answer will not be satisfactory.

Its entirely for the people to de-link themselves from politicians and politics and work for their own upliftment. The same construction workers, who gained such demand in Pune over the years, can always do that in Bihar too. The need is to find opportunities and be more enterprising.

And finally, for all those anti-Marathis or anti-Biharis, I always ask just two questions: Who was India's first President? and Who is India's president now? :)