Saturday, November 29, 2008

टला नही है समुद्री खतरा

मुंबई के ताज, ओबेराय-ट्राईडेंट होटल और नरीमन हाउस में पिछले 60 घंटों से आंतकिंयों के साथ तीनों सेनाओं, एनएसजी, नौसेना के मार्कोस कमांडों और मुंबई पुलिस की संयुक्त मुठभेड़ का अंत हो गया। लेकिन यह मुठभेड़ इससे भी बड़े खतरे का संकेत दे गया है। करीब 7000 किलोमीटर की समुद्री सीमा से घिरे भारत पर समुद्र से होनेवाले हमले का खतरा भविष्य में और मजबूत हुआ है। इस आतंकी हमले की प्रारंभिक जांच में ही पता चल गया कि आतंकी समुद्र के रास्ते आए। अवांछित गतिविधियों के लिए समुद्री रास्ते के उपयोग की बात वैसे नई नहीं है। १९९३ में इसी रास्ते दाउद हथियार लाने में सफ़ल रहा था। पेट्रोलियम की तस्करी के लिए यह मार्ग पहले से काफी मुफीद रहा ही है, सोने, ड्रग्स और हथियारों की भी भारी मात्रा में इस रास्ते तस्करी होती रही हैं।

भारत का समुद्री किनारा गुजरात के कांडला पोर्ट से लेकर पश्चिम बंगाल में हल्दिया तक फैला है। यहां बंगाल की खाड़ी और अरब सागर हैं, जहां बड़ी संख्या में आतंकी, उग्रवादी व डाकू समुद्री हमले की क्षमता के साथ सक्रिय हैं। समुद्री मार्ग से भारत पर कौन-कौन कर सकते हैं हमले, कितने सक्षम हैं हमलावर और अन्य गुट या व्यक्ति किस तरह से कर सकते हैं हमले में सहयोग इसपर एक नजर :

- विभिन्न देशों की नौसैनिक गश्त के बावजूद 2004 में समुद्री डाकुओं ने तेल और गैस के 67 जहाजों पर हमले किए।

- 2004 में मालवाहक जहाजों पर 52 हमले। डाकू जहाजों को मलक्का की खाड़ी में ले गए। यह खाडी डाकुओं के लिए स्वर्ग है।

- आतंकी हथियार या जैविक हथियार से भरे जहाजों को तट पर पहुंचाने के बाद सेल्युलर फोन से विस्फोट कर सकते हैं।

- समुद्र में स्थित तेलशोधक संयंत्रों और तटवर्ती परमाणु संयंत्रों पर हमला किया जा सकता है।

- श्रीलंकाई तमिल उग्रवादी संगठन लिट्टे के पास समुद्री युद्ध की परंपरागत और गैर परंपरागत दोनों प्रकार की क्षमता के साथ वाणििज्यक जहाजरानी की क्षमता भी है। इसका उपयोग वह नारकोटिक्स और अस्त्र-शस्त्रों की तस्करी में कर सकता है।

- फिलीपींस का अबु सय्याफ आतंकी संगठन जमीन से समुद्र में मार करने की क्षमता से लैस है।

- भारतीय समुद्री क्षेत्र में अलकायदा का सघन नेटवर्क है। उसके सहयोगी अंतरराष्ट्रीय इस्लामिक फ्रंट भी यहां सक्रिय है। इसी संगठन ने अक्टूबर 2002 में इंडोनेिशया के बाली द्वीप पर हमला कर 200 से अधिक लोगों को मार डाला था।

- अपना समुद्री क्षेत्र हेरोइन की तस्करी का स्वर्ण त्रिकोण और स्वर्ण अर्धचंद्र के नाम से कुख्यात है। अब यहां सिंथेटिक ड्रग्स का उत्पादन और इसका व्यापार होने लगा है।

- इस समुद्र में सक्रिय आतंकी-उग्रवादी गुटों में हमास, हिजबुल्ला, अलकायदा, पाकिस्तान के विभिन्न जिहादी गुट, लिट्टे, बर्मा की यूनाइटेड वे स्टेट आर्मी और दक्षिणी फिलीपींस के जिहादी शामिल हैं।

- थाईलैंड, कंबोडिया और लाओस में उग्रवादी गुटों के पास भारी मात्रा में हथियार मौजूद हैं। ये आतंकी संगठन सोने व ड्रग्स की तस्करी में लिप्त हैं।

- इस समुद्र में ट्रांस नेशनल माफिया सक्रिय है। इसमें दाउद इब्राहिम की डी कंपनी प्रमुख है। इसके तार अलकायदा और अन्य जिहादी नेटवर्क से जुड़े हैं।

- पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिकों के तार अलकायदा से। ए।क्यू. खान का तो खुलासा हो गया लेकिन बहुत अब भी छिपे रुस्तम हैं। मलेशिया, संयुक्त अरब अमीरात के अनेक वैज्ञानिक भी यहां सक्रिय हैं।

- पाकिस्तान इसी समुद्र के रास्ते एशियाई और दक्षिणी अफ्रीकी देशों में परमाणु उपकरणों की सप्लाई करता है। इससे ऐसे घातक हथियार हमेशा इस समुद्र में मौजूद हैं।

- अरब सागर में सोमालिया के समुद्री डाकुओं के अलावा हिन्द महासागर में दक्षिण चीन और इंडोनेशिया के ड्रग तस्कर व डाकू सक्रिय हैं। इनका अभी आतंकी संगठनों से संपर्क की सूचना नहीं लेकिन भविष्य में जुड़ सकते हैं तार।

- इस समुद्री इलाके में बड़ी संख्या में अज्ञात और अनाम द्वीप मौजूद हैं जिनपर किसी देश का नियंत्रण नहीं है। ये द्वीप वर्तमान में डाकुओं के अड्डे हैं। भविष्य में यहां आतंकियों के ठिकाने हो सकते हैं, जहां से भारतीय तटों पर हमले की आशंका है।

क्या इतने सारे खतरों से निपटने की तैयारी है। क्या इनसे निपटने की सक्षमता हासिल किए बिना हमारा समुद्र तट सुरक्षित माना जाएगा ?

२९ नवंबर को हिन्दुस्तान में प्रकाशित

4 टिप्पणियाँ:

अल्पना वर्मा said...

यह तथ्य वाकई में चौकाने वाले हैं --स्थिति सामान्य नहीं है-
-इस घटना के बाद जल्द ही इस विषय में जरुर कार्यवाही हो रही होगी.



[देश के लिए शहीद होने वालों को मेरा सादर नमन है.]

कविता वाचक्नवी said...
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कविता वाचक्नवी said...

सही तथ्य हैं। पर जिस देश के अधिकांश लोगों को अपने मौज मजे व सुविधा/ आवश्यकता से आगे या अतिरिक्त से वास्ता नहीं है,वह सेना, सरकार,पुलिस और तन्त्र को कोसता ही रहेगा, क्योंकि वही सबसे आसान व सरल है, कुछ नहीं करना। वरना यह सरकार, तन्त्र, पुलिस सब कौन हैं? हमीं ना!

एक एक व्यक्ति यदि आत्मानुशासित हो जाए तो देश को बदलने में देर नहीं लगेगी।

Arvind Mishra said...

जी सच कहा आपने ! बहुत क्षुब्ध है मन -यहाँ अपना वोट दें !
http://mishraarvind.blogspot.com/