Tuesday, December 30, 2008

इन सैनिकों की भी सुनिए

पूर्व सैनिकों का एक समूह इन दिनों जंतर मंतर पर अनिश्चतकालीन भूख-हड़ताल पर बैठा है। 2008 में सैन्य बलों की छवि जितनी धूमिल हुई उतनी पहले कभी नहीं। पूरे साल भर सैन्य दुनिया की फिजाओं में संकट के बादल उमड़ते रहे हैं।

जंतर-मंतर पर सड़क के किनारे पूर्व सैनिक भूख हड़ताल पर बैठे हैं। एक महिला डॉक्टर इन हड़तालियों के ब्लड प्रेशर, नाड़ी आदि चेक करती हैं। वहां के रजिस्टर में हड़तालियों का ब्लड प्रेशर सामान्य है, नाड़ी भी सामान्य। समूह में सिपाही सुलेमान खान हैं तो पूर्व उप सेना प्रमुख ले। जन. राज कदयान भी हैं।

बरेली का एक रिटायर जेसीओ अपने रिटायर साथियों को 10 मिनट तक फोन पर कांग्रेस और भाजपा दोनों का विरोध करने की सलाह देता है। वहां जो उचित हो वही करने की सलाह भी देता है पर राजनीतिक समझ के साथ। एक कारगिल शहीद की विधवा वहां उपस्थित लोगों से आंसू भरी आंखों से अपील करती हैं कि आशा न छोड़ें, संघषZ कभी न छोड़ें। यहां कोई तमाशा नहीं है। यहां न तो शोर शराबा है और न ही आने पर रोक। लेकिन यह एक ऐसी कहानी है जिससे हर देशवासी को अवगत होना चाहिए। आप इन पूर्व सैनिकों की मांग से सहमत हों या न हों लेकिन आप अन्याय की कटू पीड़ा का अनुभव तो करते ही होंगे। इससे सरकार से इनका भरोसा भी उठ गया है।

याद रखें कि यह ऐसे समय में हो रहा है जब मुंबई हमले से पूरा देश उद्वेलित हो रहा है। इनका नुकसान यह हुआ है कि छठे वेतन आयोग ने सशस्त्र बलों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है।
आजकल राजनेताओं को सीधे तौर पर स्वार्थी और बेइमान मान लिया जाता है। नौकरशाह तो पहले से ही भ्रष्ट हैं। पिछले छह दशकों में बलों ने केवल बाबुओं के लिए काम किया है और पिछले कुछ महीनों से यही पानी सिर से ऊपर बहने लगा है।

सैन्य बलों के अधिकांश अधिकारियों का मत है कि संप्रग सरकार ने मालेगांव विस्फोट की जांच के द्वारा देश के लोगों में सेना की यह छवि बनायी है कि लोग जितना ईमानदार सेना को समझते हैं, वह उतनी है नहीं और इसलिए उसक मांगें भी मानने लायक नहीं है। मालेगांव विस्फोट में एक ले। कर्नल आरोपी है।

वह तो भला हो प्रधानमंत्री का, जिन्होंने छठे वेतन आयोग की संस्तुतियों में सुधार कर सेना में कुछ खुशी आयी है। आगामी साल 2009 भी सेनाओं के लिए संभवत: बहुत खुशी का साल न रहे लेकिन इस साल मे चुनाव और बदलाव की संभावना है जो सेना के लिए खुशखबरी ला सकती है।


(निवेदिता खांडेकर के सहयोग से िशव अरूर की रिपोर्ट पर आधारित)

3 टिप्पणियाँ:

नीरज गोस्वामी said...

नव वर्ष की आप और आपके समस्त परिवार को शुभकामनाएं....
नीरज

Amit said...

हम भी यही चाहते हैं की आने वाला साल उनके लिए जरुर खुशियाँ लेकर आए....नव वर्ष की आपको हार्दिक शुभकामनाये....

श्रीकान्त मिश्र 'कान्त' said...

किस से न्याय की अपेक्षा है ..... यह आलेख इस लिंक पर पढ़ें
एक सैनिक की खरी खरी [आलेख] - श्रीकान्त मिश्र 'कान्त'http://www.sahityashilpi.com/2008/12/blog-post_05.html
और यदि अधिक चाहें तो ..
मुम्बई हमले के निहितार्थ ....
http://trishakant.blogspot.com/

नव वर्ष की हार्दिक शुभकामना .....