भूमंडलीकरण के परिणामों और विकास कों देखने का कों तरह का नजरिया इस समय दुनिया में है। एक तरफ़ जहाँ संपन्न लोगों और पूंजीपतियों के बीच चल रही प्रतिस्पर्धा में विकास कों देखा जाता है और इनके बीच की गैर बराबरी कों दूर कराने पर बहस चलती है। लेकिन दूसरी ओर दुनिया के समाजों मे दबे कुचले लोगों की दृष्टि से इस विकास और गैर बराबरी कों देखने का नजरिया है। हालांकि इस दूसरी धारा में सोचने वालों की संख्या नगण्य है।
९ अप्रैल कों राहुल साम्कृत्यायण स्मृति व्यख्यायण में समाजवादी विचारक सच्चिदानंद सिन्हा ने अपने विचार इसी धारा कों ध्यान में रखकर व्यक्त किए। यह व्याख्यान दिल्ली के कान्स्तीतेयुशन क्लब के डिप्टी स्पीकर हॉल में हुआ। कई दिनों से लगातार बुखार में रहने के बावजूद करीब एक घंटे तक अपना लिखित शोध पत्र प्रस्तुत किया। अस्सी वर्षीय सच्चिदा जी का पूरा जीवन समाजवाद कों समर्पित rahaa है। उन्होंने majdoori से अपना जीवन nirvaah किया है। कल से maitry पर इस शोध पत्र कों kishton में prakashit किया jayegaa।




